Friday, 18th October, 2019

चलते चलते

म्युनिसिपल चुनावों में TMC से बिना मार खाए वोट देने पहुँचे मतदाता, वीरता पुरस्कार के लिए चयनित

26, May 2018 By Guest Patrakar

कोलकाता. हर भारतीय की ज़िंदगी में एक दिन ऐसा ज़रूर आता है, जब उसे वीरता पुरस्कार जीतने का मौक़ा मिलता है। ऐसा ही कुछ बंगाल के उन 4 युवकों के साथ हुआ, जिन्होंने तृणमूल काँग्रेस (टीएमसी) के गुंडों से बिना मार खाए अपना वोट दे दिया और वीरता पुरस्कार के हक़दार बन बैठे। हल्दिया इलाक़े के परेश, निलेश, जगनपाल और ब्योमकेश ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी मामूली सी बहादुरी उन्हें इतना बड़ा अवॉर्ड दिला देगी। लेकिन ऐसा हुआ हाल ही में संपन्न हुए म्युनिसिपल चुनावों में!

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जान हथेली पे रखकर वोट डालने जाते चारों वोटर

इन चुनावों में टीएमसी कार्यकर्ता हर उस बंदे को धो रहे थे, जो बीजेपी या किसी और विपक्षी पार्टी को वोट दे रहा था। इतना ही नहीं, कई कार्यकर्ताओं ने तो वो बैलेट बॉक्स ही उठाकर पानी में डाल दिए, जिसमें बीजेपी को ज़्यादा वोट पड़ रहे थे। हमने मामले की पूरी जानकारी के लिए चीफ़ इलेक्शन ऑफ़िसर प्रभु दास से बात की, उन्होंने बताया कि “उस दिन पूरे बंगाल में हिंसा का तांडव हो रहा था। TMC के कार्यकर्ताओं ने वोटरों के साथ-साथ मुझे और मेरे साथियों को भी नहीं बख़्शा।”

“मैं उस समय हल्दिया में ही था, जब वे चारों युवक वोट देने आए थे। ना उनके कपड़े फटे हुए थे और ना ही उनके चेहरे पर पिटने के निशान थे। ऐसे में जब मैंने उनसे पूछा कि तुम्हें किसी ने पीटा नहीं, तो उन्होंने बड़ी शालीनता से जवाब दिया ‘नहीं!’ मुझे वहीं उनकी बहादुरी का एहसास हो गया और मैंने उनका नाम वीरता पुरस्कार के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया।”

इस ख़बर से ममता दी बहुत ग़ुस्से में हैं। उनका कहना है कि हम लोग म्युनिसिपल के चुनावों में ऐसे ढीले पड़ गए तो लोकसभा चुनाव में क्या करेंगे!”

उधर, इन युवकों को जून के पहले हफ़्ते में राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। पुरस्कार के साथ-साथ इन्हें 21000/- रुपए, सरकारी नौकरी और रहने के लिए सरकारी क्वार्टर दिया जायेगा।



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