Tuesday, 25th September, 2018

चलते चलते

एक अप्रैल की जगह 8 नवंबर को मनाया जाएगा 'अप्रैल फूल दिवस', कैबिनेट ने दी मंज़ूरी

31, Aug 2018 By Fake Bank Officer

नयी दिल्ली. कुछ खास दिन ऐसे होते हैं जो इतिहास में दर्ज हो जाते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी दिन होते हैं जो ‘इतिहास’ ही बदल देते हैं। 8 नवंबर 2016 का दिन, एक ऐसा ही दिन था, जो अब तक काले धन के खिलाफ लड़ाई शुरू करने के लिए याद किया जाता था, लेकिन अब यह दिन किसी  और नाम से जाना जाएगा। RBI की वार्षिक रिपोर्ट जारी होते ही सरकार ने अब 1 अप्रैल की जगह 8 नवंबर को ‘अप्रैल फूल’ मनाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इसी दिन दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों को एक साथ ‘अप्रैल फूल’ बनाया गया था!

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नए अप्रैल फूल दिवस की घोषणा करते मोदी जी

विपक्ष जहाँ इसे सरकार का असल मुद्दों से ध्यान घटकने वाला कदम बता रही है, वहीँ वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे मोदी सरकार का एक और मास्टर स्ट्रोक बताया है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी है और अब जल्द ही सरकार गज़ट नोटिफिकेशन लाने वाली है। सरकार के इस फैसले से दुनिया भर के मूर्खो में हर्ष का माहौल है और संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस कदम का स्वागत किया है।

मूर्खों के सबसे बड़े वैश्विक मंच ‘अंतरराष्ट्रीय मूर्ख संगठन (IIO)’ के निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंक ने इसे भारत सरकार का सही समय पर लिया गया सही फैसला बताया है। फ़ेकिंग न्यूज से बात करते हुए ट्रंक ने बताया- “जब मैं अमेरिका का राष्ट्रपति चुना गया था तो मुझे लगा कि मैंने काफी लोगो को सक्सेसफुली मूर्ख बनाया है, लेकिन आठ नवंबर की रात को इंडिया में जो कुछ भी हुआ है उसे देखकर तो मुझे भी आश्चर्य होता है! जिस तरह मोदीजी ने सवा सौ करोड़ भारतीयों को एक साथ पप्पू बना दिया, उसकी तो कोई मिसाल ही नही है। मैं भी अमेरिका में आठ नवंबर को ही मूर्ख दिवस मनाने की घोषणा करता हूँ!”

उधर, रिपब्लिक टीवी देखकर अपने दोनों कान खराब कर चुके हमारे संवाददाता ने इस विषय पर ख्यातिप्राप्त प्रवक्ता संबित पात्रा से चर्चा की, उन्होंने बताया कि “वैसे तो नोटबंदी ने देश को अनेकों नये अर्थशास्त्री दिए हैं, जैसे बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर, सुधीर चौधरी आदि! फिर भी चूना लगाने के मामले में जो काम उस दिन किया गया वो तो पिछले सत्तर साल में नही हुआ था। एक अप्रैल को तो आजकल बच्चे भी उल्लू नही बनते इसलिए वह अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं, अब तो अप्रैल फूल आठ नवंबर को ही मनाएंगे!”



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