Friday, 20th July, 2018

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जंगल मे जानवरों की हुई आपात बैठक, अपनी बहू-बेटियों को इंसानों से बचाने पर की चर्चा

08, Jul 2018 By Fake Bank Officer

उन्नाव. महिलाओं के खिलाफ देश मे हो रहे अपराधों ने जनता ही नही जानवरों को भी चिंता में डाल दिया है। जंगल के जानवर अब इस दहशत में हैं कि अपनी बहन, बेटियों को इन ‘इंसानों’ से कैसे बचाया जाए? इसी सिलसिले में सभी जानवरों की एक आपात बैठक कल पुरानी हवेली के पीछे आयोजित की गयी थी।

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शेरनी को भी बचकर रहने की दी गई सलाह

सदन के पटल पर भूमिका बनाते हुए बूढ़े हाथी ने बात रखी “भाइयों और बहनों! आप लोग जानते ही हैं कि ‘मनुष्य’ एक स्वार्थी और ठरकी किस्म का प्राणी है! जिस तरह से महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, वह दिन दूर नही जब हमारी बहू-बेटियाँ भी उनके निशाने पर आ जाएँगी! इसी विषय पर एक पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन देने के लिए मैं भाई गोरिल्ला जी को आमंत्रित करता हूँ!” -कहकर वे वहीँ बगल में बैठ गए।

गोरिल्ला जी उछलकर सामने आए और उन्होंने पिछले दस साल का क्राइम का डेटा डायग्राम की मदद से समझाते हुए, और थॉमसन रॉयटर की रिपोर्ट की व्याख्या करते हुए बताया कि किस प्रकार आदमियों से दूर रहने में ही मादा पशुओं की भलाई है। इसके बाद उसने प्रोजेक्टर पर इसी मुद्दे से संबंधित कुछ वीडियो भी चलाये, जो उन्हें कुछ छिछोरे आदमियों के व्हाट्सएप्प मैसेज से मिले थे।

इस डरावनी प्रेजेंटेशन से सभी जानवर सहम गए। सभा मे बैठी, डरी सहमी गाय ने मक्खियाँ उड़ाते हुए सवाल किया “..तो क्या सचमुच हमारी इज़्ज़त खतरे में है?”

“तुम तो रहने ही दो गाय बहन! तुम्हारी ओर तो कोई मुआ, आँख भी उठाकर देखता है तो उसकी जान पर बन आती है, तुमको कौन छेड़ेगा? खतरा तो हमें हैं! सुना है कि आदमी लोग मनचाहा प्यार न मिलने पर लड़की पर तेजाब फ़ेंक देते हैं!” -पानी मे अपनी शक्ल निहारते हुए एक मादा सुअर बोलीं।

“बात सच है! गाय की चिंता हमको नही है, उसे तो इंसान बचा ही लेगा, लेकिन बाकी जानवरों की बहू-बेटियाँ सुन लें, जब तक माहौल ठीक नहीं हो जाता तब तक बस्ती से दूर ही रहें! खासकर रात के समय तो अपने मांद से बाहर ही ना निकलें।” -इस चेतावनी के साथ हाथी काका ने सभा समाप्ति की घोषणा की।



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