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'ज़िहाल-ए-मस्कीं मकुन बा-रंजिश' -वाले गाने को गलत तरीके से गाने पर अलीगढ़ में तनाव, यूपी पुलिस ने इलाके को घेरा

26, Dec 2019 By Ritesh Sinha

अलीगढ़.  नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ चल रहा विरोध-प्रदर्शन अभी ठीक से समाप्त भी नहीं हुआ है कि यूपी पुलिस के लिए एक नयी समस्या खड़ी हो गयी है। सूचना मिली है कि अलीगढ़ के बाहरी इलाके में ‘ज़िहाल-ए-मस्कीं मकुन बा-रंजिश’ वाले गाने को लेकर दो गुट आपस में गुत्थगुत्था हो गये। दोनों गुटों ने एक दूसरे पर जमकर हाथ साफ़ किया है।

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इसी गाने की वजह से हुआ हादसा

हुआ यूँ कि अमरीश नाम का एक लड़का ‘गुलामी’ फिल्म के इस मशहूर गाने को जोर-जोर से गा रहा था तभी परवेज ने उसे टोंक दिया कि ‘अबे! तू गलत गा रहा है, ठीक से गा, वो ‘ज़िहाल-ए-मस्कीं मकुन बा-रंजिश’ नहीं बल्कि ‘ज़िहाल मौसी की मकुन तगाफुल’ है!

जिस समय परवेज ने अमरीश को टोंका उस समय वो बड़े चाव से धुन पकड़कर गाना गा रहा था, इसीलिए उसे गुस्सा आ गया। उसने वहीं पर पड़ा एक पत्थर उठाया और परवेज को फेंककर मार दिया।

कालांतर में बच्चों की इस लड़ाई में बड़े भी कूद गये और डिस्प्यूट का आकार दस गुना तक बढ़ गया। पूरा इलाका दो गुटों में बँट गया, सबने एक-दूसरे पर जमकर लात-घूँसे बरसाए। थोड़ी देर बाद अमरीश गुट ने अपने घरों से ‘डंडा’ निकालकर माहौल में नयी जान फूँक दी।

इस युद्ध को देखने वालों की भीड़ भी जमा हो गयी, मजा बढ़ता चला गया। इस बीच मनोरंजन से नफरत करने वाले कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस में खबर कर दी। अलीगढ़ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके को घेर लिया और उपद्रवियों को अरेस्ट कर लिया।

जेल में अपने वकील का इंतजार कर रहे परवेज ने बताया कि, “गुलजार साब ने मुझे फोन करके इस मुखड़े का सही अर्थ बताया था, साथ ही यह भी बताया था कि इसका उच्चारण कैसे करना है!

आज तक मैं जितने भी लोगों से मिला हूँ वो सब इस गाने को गलत तरीके से गाते हैं, इसीलिए मैंने उस दिन अमरीश को टोक दिया था, इतनी सी बात पर साले ने मुझे बेदर्दी से कूट दिया है!” -परवेज ने कराहते हुए कहा। साथ ही उसने केंद्र सरकार से माँग की है कि इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाया जाए और लोगों को सही तरीके से गाने के लिए प्रेरित किया जाए।



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