Sunday, 8th December, 2019

चलते चलते

विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए गाइडलाइन्स जारी करेगी 'सेबी'

26, Nov 2019 By चीखता सन्नाटा

मुंबई. कर्नाटक और उसके बाद महाराष्ट्र में बागी विधायकों के बीच उठापटक के बीच ‘सेबी’ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक उच्च-स्तरीय टीम गठन करने का निर्णय लिया है ताकि विधायकों की खरीद-फरोख्त को संचालित किया जा सके।

sebi
‘सेबी’ भी कूदी मैदान में

सेबी के इस क्रांतिकारी कदम के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक आठ सौ अंक तक उछल गया।

सेबी के एक उच्च अधिकारी ने हमें बताया कि, “इसमें विधायकों के इंश्योरेंस से लेकर उनकी ब्लैक मार्केटिंग रोकने जैसे कई महत्वपूर्ण पक्षों पर ध्यान दिया जा रहा है, भारत में विधायकों की खरीद-फरोख्त का कारोबार सालाना 10,000 करोड़ की दर से बढ़ रहा है, चुनाव के बाद तो ये अक्सर 20-25% तक बढ़ जाता है, त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में इस संख्या में 80-90% तक उछाल आ जाता है!

भारत में सिक्यूरिटीज़ मार्केट के बदलते परिदृश्य और निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए गाइडलाइन्स का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, 2021 तक यह प्रारूप तैयार हो जाएगा!” -उन्होंने आगे बताया।

बताया जा रहा है कि गाइडलाइन्स लागू होने के बाद मिनिमम  गारंटी प्रोग्राम के अंतर्गत विधायकों की खरीदी होने पर एक साल तक उस खरीदी की वैलिडिटी रहेगी। इस दौरान उस विधायक को कोई दूसरी पार्टी नहीं खरीद सकेगी। विधायकों का न्यूनतम मूल्य निर्धारित होगा जो विधायकों को पार्टियों के शोषण से बचाएगा।

साथ ही इंट्रा-डे ट्रेडिंग पर भी रोक लग सकती है, हालाँकि BTST पहले की तरह चलता रहेगा, इससे उन छोटी पार्टियों को भी लाभ होगा जो संख्या कम होने के कारण मौके का लाभ उठाने से चूक जाते हैं। बैंक से आसान किस्तों पर लोन लेने की भी सुविधा दी जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार ‘सेबी’ के इस कदम से शार्ट-टर्म में छोटी पार्टियों को नुकसान होगा और बड़ी पार्टियां लाभ की स्थिति में होंगी। विधायकों के ‘मुक्त बाजार’  से देश में निवेश बढ़ने की गहरी संभावना है। विदेशी निवेशकों को इस कारोबार में भाग लेने की इजाजत नहीं होगी।



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